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उत्तरकाशी में आधुनिक सेब ग्रेडिंग-पैकेजिंग से बागवानों की बढ़ी आय, 25 ग्रामीणों को मिल रहा रोजगार

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Uttarkashi News: उत्तरकाशी जिले के मोरी विकासखंड के दुचाणू गांव निवासी बागवान सुनदास ने सरकारी बागवानी एवं प्रसंस्करण योजनाओं का लाभ उठाकर सेब उत्पादन के साथ-साथ ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग को भी अतिरिक्त आय का जरिया बनाया है। आधुनिक सुविधाएं मिलने के बाद उनकी यूनिट से न केवल सेब की गुणवत्ता के अनुसार बेहतर पैकेजिंग हो रही है, बल्कि आसपास के अन्य बागवानों को भी इसका लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित योजनाओं के तहत सुनदास को HMNEH योजना के अंतर्गत करीब 2 लाख रुपये की लागत से ग्रेडिंग हॉल और PMFME योजना के तहत करीब 5 लाख रुपये की लागत से ग्रेडेड पैकेजिंग एवं सॉर्टिंग यूनिट उपलब्ध कराई गई है।

ग्रेडिंग हॉल में बागानों से लाए गए सेबों को आकार, रंग और गुणवत्ता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। इसके बाद सॉर्टिंग यूनिट की मदद से खराब, क्षतिग्रस्त और गुणवत्ताहीन फलों को अलग कर बेहतर गुणवत्ता वाले सेबों की पैकेजिंग की जाती है।

ग्रेडिंग के बाद सेबों को उनकी गुणवत्ता के अनुसार कोरुगेटेड बॉक्स में पैक कर मंडियों और बाजारों तक भेजा जाता है। आधुनिक मशीनरी उपलब्ध होने से जिन कार्यों में पहले कई दिन लग जाते थे, वे अब कुछ घंटों में पूरे हो रहे हैं। इससे समय और श्रम की बचत के साथ बागवानों को बेहतर विपणन सुविधा भी मिल रही है।

सुनदास की यूनिट का लाभ आसपास के बागवान भी उठा रहे हैं। सेब की ग्रेडिंग और पैकेजिंग के माध्यम से उन्हें 2.5 गुना से अधिक अतिरिक्त आय मिलने की जानकारी दी गई है। इससे स्थानीय स्तर पर सेब उत्पादकों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल रही है।

सेब सीजन के दौरान यूनिट के माध्यम से करीब 20 से 25 स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा सुनदास को योजनाओं के तहत प्लास्टिक क्रेट और कोरुगेटेड बॉक्स भी राज सहायता पर उपलब्ध कराए गए हैं।

प्लास्टिक क्रेट से सेबों के सुरक्षित परिवहन और भंडारण में सुविधा मिलती है, जबकि कोरुगेटेड बॉक्स फलों को मंडियों तक पहुंचाने के दौरान बाहरी चोट और नमी से बचाने में मदद करते हैं।

इन सुविधाओं पर 50 प्रतिशत राज सहायता मिलने से बागवानों के लिए आधुनिक बागवानी, प्रसंस्करण और विपणन व्यवस्था को अपनाना आसान हुआ है। दुचाणू गांव की यह पहल स्थानीय स्तर पर सेब उत्पादन को बेहतर बाजार से जोड़ने के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार और बागवानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

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