उत्तराखंडग्रामोत्थान परियोजना से बदली भैंसकोटी की महिलाओं की जिंदगी, बेकरी उद्यम से...
spot_img

ग्रामोत्थान परियोजना से बदली भैंसकोटी की महिलाओं की जिंदगी, बेकरी उद्यम से आत्मनिर्भरता की रची नई कहानी

Advertisement

spot_img

टिहरी गढ़वाल (प्रदीप शाह)- टिहरी के विकासखंड थौलधार के ग्राम भैंसकोटी की राजेश्वरी सकलानी, गीता भट्ट, आशा देवी, रजनी, अनीता, विशिला देवी और शकुन्तला देवी आज क्षेत्र में सफल उद्यमी महिलाओं के रूप में पहचान बना रही हैं। कभी घर-गृहस्थी, पशुपालन और खेती तक सीमित रहने वाली इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में संचालित ग्रामोत्थान परियोजना का लाभ उठाकर स्वरोजगार की राह पकड़ी और आज न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।‎भैंसकोटी की ये सात महिलाएं दिव्य ग्राम संगठन से जुड़ी हैं। संगठन के अंतर्गत शिवालय स्वयं सहायता समूह, संतोषी समूह और लक्ष्मी समूह की महिलाओं ने जनवरी 2026 से ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से बेकरी उद्यम शुरू किया।

परियोजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता, मार्गदर्शन और उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक सहयोग मिला।‎‎ग्रामोत्थान परियोजना के तहत दिव्य ग्राम संगठन का चयन उद्यम सर्वेक्षण के दौरान किया गया। परियोजना टीम द्वारा भौतिक सत्यापन के बाद संगठन को 6 लाख रुपये की परियोजना सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। इसके अतिरिक्त 3 लाख रुपये का बैंक ऋण और 1 लाख रुपये का स्वयं का अंशदान मिलाकर कुल 10 लाख रुपये की लागत से बेकरी उद्यम स्थापित किया गया।‎‎राजेश्वरी सकलानी बताती हैं कि जनवरी 2026 में परियोजना से मिली सहायता से बेकरी के लिए मशीनें और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे गए। इसके बाद महिलाओं ने स्थानीय उत्पादों और क्षेत्र की पसंद को ध्यान में रखते हुए मंडुवा बिस्किट, आटा बिस्किट, मशरूम बिस्किट, फैन, बन, ब्रेड और केक सहित विभिन्न बेकरी उत्पाद तैयार करने शुरू किए। इन उत्पादों की बिक्री थौलधार, कमांद, कांडीखाल और टिहरी के बाजारों में मांग के अनुसार की जा रही है।‎‎आज इस छोटे से ग्रामीण उद्यम से महिलाओं को हर माह लगभग 50 से 60 हजार रुपये की आय हो रही है, जिसमें करीब 30 से 40 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित हो रहा है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और उनके परिवारों को आत्मनिर्भरता की नई राह मिली है।‎‎

महिलाएं बताती हैं कि पहले उनका जीवन घरेलू कार्य और खेती-किसानी तक सीमित था, लेकिन ग्रामोत्थान परियोजना ने उन्हें अपनी क्षमता को पहचानने और उसे उद्यम में बदलने का अवसर दिया। आज वे स्वयं अपने व्यवसाय का संचालन कर रही हैं, बाजार की मांग के अनुसार उत्पाद तैयार कर रही हैं और अपनी मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को नई दिशा मिली है।‎‎राजेश्वरी सकलानी और उनके समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जिला प्रशासन तथा ग्रामोत्थान परियोजना की टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं और सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। अब वे अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की दिशा में काम करना चाहती हैं।‎प्रभारी ‎परियोजना निदेशक, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण ज्योति ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय संसाधनों एवं उनकी क्षमता के अनुरूप स्वरोजगार से जोड़ना है। भैंसकोटी की महिलाओं की सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित मार्गदर्शन, वित्तीय सहयोग और मेहनत के बल पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। परियोजना के माध्यम से ऐसे और समूहों को चिह्नित कर उन्हें उद्यम स्थापना एवं आजीविका संवर्धन के लिए आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।‎‎भैंसकोटी की महिलाओं की यह कहानी ‘सरकार की योजना, महिलाओं की मेहनत और आत्मनिर्भर गांव’ की उस तस्वीर को सामने लाती है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ा रही है।

‎‎

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Advertisement

spot_imgspot_img
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img

Popular

More like this
Related

स्वतंत्रता दिवस पर शैल संकल्प फाउंडेशन कार्यालय में ध्वजारोहण

अठूरवाला,देहरादून- (प्रदीप शाह) स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर...