अगस्त्यमुनि (रुद्रप्रयाग): देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की देवरा (चल विग्रह) यात्रा लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद निकाली गई। इस ऐतिहासिक यात्रा को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए दूर-दराज़ से श्रद्धालु उमड़ पड़े। मंदिर परिसर से देव डोली निकलते ही पूरे क्षेत्र में “मुनि महाराज की जय” के जयकारे गूंज उठे।

लेकिन यात्रा के दौरान एक अप्रत्याशित घटना ने श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रशासन को भी सकते में डाल दिया। जब देव डोली अगस्त्य ऋषि सैण (मुख्य क्षेत्र) की ओर बढ़ी, तो स्टेडियम के पास बने गेट के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया और डोली आगे नहीं बढ़ सकी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे देव अप्रसन्नता के रूप में देखा गया। डोली को आगे बढ़ाने के लिए पुजारियों, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने काफी देर तक प्रयास किए, लेकिन डोली वहीं रुक गई।
डोली के रुकते ही केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। हाईवे के दोनों ओर तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे यात्रियों, श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही और सड़क पर लंबी कतारें लग गईं।

काफी प्रयासों के बावजूद जब स्थिति सामान्य नहीं हो सकी, तो अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की देव डोली वापस मंदिर परिसर लौट गई। इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में अव्यवस्था, अतिक्रमण और धार्मिक मार्गों पर आधुनिक निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगस्त्य ऋषि की तपस्थली के स्वरूप से छेड़छाड़ और अव्यवस्थित विकास ही इस स्थिति का कारण बना है।
इस घटना के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि केदारनाथ हाईवे पर लगे लंबे जाम और देव डोली के लौटने की इस घटना से सबक लेते हुए भविष्य में धार्मिक परंपराओं और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखकर ठोस कदम उठाए जाएंगे।


