उत्तराखंड: उपनल कर्मियों के लिए ऐतिहासिक फैसला, ‘समान कार्य-समान वेतन’ की राह हुई आसान; हजारों को मिलेगा लाभ
देहरादून | 17 फरवरी, 2026
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने प्रदेश के हजारों उपनल (UPNL) कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात दी है। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे कर्मचारियों के लिए कैबिनेट ने ‘समान कार्य-समान वेतन’ के क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किया है। सरकार ने अब इस योजना के लाभ के लिए कट-ऑफ तिथि को संशोधित कर दिया है, जिससे अब और अधिक कर्मचारी इसके दायरे में आएंगे।
1 जनवरी 2016 बनी नई कट-ऑफ डेट
कैबिनेट के ताजा फैसले के अनुसार, अब 1 जनवरी 2016 से पहले नियुक्त हुए सभी उपनल कर्मचारियों को पहले चरण में ही ‘समान कार्य-समान वेतन’ का लाभ दिया जाएगा। इससे पहले सरकार ने 10 वर्ष की निरंतर सेवा (2015 तक) की शर्त रखी थी, जिसे अब और स्पष्ट और विस्तारित किया गया है। इस निर्णय से उन कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा जो पिछले 8-10 वर्षों से विभिन्न सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
वेतन में होगी भारी बढ़ोतरी
इस योजना के लागू होने से उपनल कर्मियों के मानदेय में उनकी श्रेणी (अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और उच्च-कुशल) के आधार पर बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
- अनुमानित लाभ: जानकारों के अनुसार, कर्मचारियों के वेतन में ₹5,000 से लेकर ₹15,000 तक की वृद्धि हो सकती है।
- समानता का अधिकार: अब उपनल कर्मी भी नियमित कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान (Basic Pay) के हकदार होंगे, जो उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम है।
किन विभागों पर पड़ेगा असर?
राज्य के लगभग सभी प्रमुख विभागों में उपनल के माध्यम से करीब 22,000 से अधिक कर्मचारी तैनात हैं। इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा (UPCL/UJVNL), और लोक निर्माण विभाग (PWD) में कार्यरत तकनीकी और गैर-तकनीकी कर्मचारियों को मिलेगा।
मुख्यमंत्री का रुख: “कर्मचारियों का हित सर्वोपरि”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय पर खुशी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “उपनल कर्मचारी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनकी जायज मांगों को स्वीकार करना सरकार का कर्तव्य है।”
कर्मचारी संगठनों ने जताया आभार
सरकार के इस रुख के बाद उपनल कर्मचारी महासंघ और अन्य संगठनों ने सचिवालय पहुंचकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है। हालांकि, संगठनों का कहना है कि वे अब इस फैसले के आधिकारिक शासनादेश (GO) के जल्द जारी होने और इसे अप्रैल 2026 के वेतन से लागू करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


