ऋषिकेश में अस्पताल की बड़ी लापरवाही: डॉक्टर बीमार तो सिस्टम लाचार! अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रहे मरीज

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ऋषिकेश: उत्तराखंड सरकार ‘बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं’ के चाहे जितने दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। ऋषिकेश के एस. पी. एस. राजकीय उप जिला चिकित्सालय से अव्यवस्था की एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। अस्पताल में पिछले कई दिनों से अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटका हुआ है, जिसके चलते मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

डॉक्टर बीमार, तो सुविधा बंद?

जब अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने का कारण जानने की कोशिश की गई, तो वहां मौजूद अधिकारी ने बताया कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर की तबीयत खराब है। हैरानी की बात यह है कि डॉक्टर के बीमार होने पर अस्पताल प्रशासन ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था जल्द से जल्द करने की कोशिश नहीं की, जिसका खामियाजा अब गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

मरीजों का दर्द साफ दिखाई पड़ा जब उन्होंने कहा की “10 दिन से चक्कर काट रहें है”, अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि मरीज इलाज की आस में रोज आते हैं और निराश होकर लौट जाते हैं।

इलाज के लिए आईं मरीज राधिका ने बताया कि वह पिछले 10 दिनों से लगातार अस्पताल आ रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद मिलता है। उन्होंने कहा, “हम इतने सक्षम नहीं हैं कि प्राइवेट अस्पतालों का महंगा खर्च उठा सकें। सरकार से अपील है कि जल्द से जल्द मशीन चालू करवाई जाए।”

गर्भवती महिलाओं की जान से खिलवाड़

लापरवाही की हद तब पार हो गई जब एक बुजुर्ग महिला अपनी गर्भवती बेटी को लेकर भटकती नजर आईं। महिला का आरोप है कि अस्पताल कर्मियों ने न केवल उनकी बेटी का इलाज करने से मना किया, बल्कि उन्हें बाहर (प्राइवेट) से इलाज करवाने की सलाह तक दे दी। आर्थिक तंगी से जूझ रहा यह परिवार अब अल्ट्रासाउंड सुविधा बंद होने से और अधिक परेशान है।

अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल

सरकारी अस्पतालों पर आम जनता का भरोसा इसलिए होता है क्योंकि वे निजी अस्पतालों का भारी-भरकम बिल नहीं चुका सकते। लेकिन जब सरकारी मशीनरी ही हाथ खड़े कर दे, तो आम आदमी कहाँ जाए? यह घटना केवल एक मशीन के बंद होने की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की नाकामी की है, जहाँ डॉक्टर के अवकाश पर होने पर मरीजों को भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।

यह मामला सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर सुविधाओं की निगरानी करे और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

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