हल्द्वानी/नैनीताल: उत्तराखंड के तराई और भाबर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Man-Animal Conflict) थमने का नाम नहीं ले रहा है। रामनगर और आसपास के इलाकों में जंगली हाथियों के उत्पात से लोग पहले ही परेशान थे, और अब हल्द्वानी व नैनीताल जिले के जंगलों से सटे इलाकों में एक बाघ की दस्तक ने दहशत फैला दी है।
काठगोदाम और गोलापार में देखा गया बाघ
वन विभाग के सूत्रों और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में काठगोदाम, गोलापार और चोरगलिया से सटे वन क्षेत्रों में एक वयस्क बाघ की मूवमेंट देखी गई है। कुछ जगहों पर बाघ के ताजे पगचिह्न भी मिले हैं। जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों का कहना है कि रात के समय बाघ की दहाड़ सुनाई दे रही है, जिससे उनमें भारी खौफ है।
वन विभाग अलर्ट मोड पर, लगाए पिंजरे
बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होते ही वन विभाग हरकत में आ गया है। बाघ की सही लोकेशन और पहचान के लिए प्रभावित इलाकों में दर्जनों ट्रैप कैमरे (Trap Cameras) लगाए गए हैं। वनकर्मियों की कई टीमें दिन-रात गश्त कर रही हैं और लोगों को जागरूक कर रही हैं। एहतियात के तौर पर गोलापार के एक संवेदनशील इलाके में पिंजरा भी लगाया गया है।
शाम होते ही घरों में कैद हो रहे लोग
बाघ के डर से इन इलाकों में अघोषित ‘नाइट कर्फ्यू’ जैसे हालात बन गए हैं। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग ने एडवाइजरी जारी कर लोगों से अपील की है कि वे सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद अकेले जंगलों या सुनसान रास्तों पर न जाएं। बच्चों और मवेशियों को भी सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है। शाम 6 बजते ही गांवों की सड़कें और गलियां सुनसान हो जाती हैं और लोग अपने घरों के अंदर रहने को मजबूर हो जाते हैं।



