देहरादून: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों की सबसे बड़ी समस्या ‘पलायन’ पर लगाम कसने के लिए राज्य सरकार ने अब तक का सबसे बड़ा और ठोस कदम उठाया है। खाली हो चुके गांवों को फिर से आबाद करने और सीमांत क्षेत्रों को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से आज सरकार ने ‘मुख्यमंत्री ग्राम्य विकास योजना’ (Mukhyamantri Gramya Vikas Yojana) के नए चरण की रूपरेखा पेश कर दी है। इस योजना के तहत पहाड़ लौटने वाले और स्वरोजगार अपनाने वाले युवाओं के लिए सरकार ने अपना खजाना खोल दिया है।
‘घोस्ट विलेज’ और सीमांत गांवों पर रहेगा मुख्य फोकस
पिछले कुछ दशकों में रोजगार और सुविधाओं के अभाव में उत्तराखंड के सैकड़ों गांव पूरी तरह से खाली हो चुके हैं, जिन्हें ‘घोस्ट विलेज’ (Ghost Villages) कहा जाता है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटे गांवों का खाली होना सामरिक दृष्टि से भी चिंता का विषय रहा है। सरकार के नए एक्शन प्लान के तहत इन्हीं दो श्रेणियों के गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है।
युवाओं के लिए बंपर ऑफर: 50% सब्सिडी और ब्याज मुक्त लोन
योजना के नए चरण के तहत यदि कोई युवा या परिवार इन खाली हो चुके या सीमांत गांवों में वापस लौटकर अपना स्वरोजगार शुरू करता है, तो सरकार उन्हें भारी आर्थिक मदद देगी: युवाओं को अपना व्यवसाय स्थापित करने के लिए सरकार की ओर से 50% तक की भारी सब्सिडी प्रदान की जाएगी। शुरुआती पूंजी की समस्या को खत्म करने के लिए सरकार जीरो प्रतिशत (0%) ब्याज पर लोन भी मुहैया कराएगी, ताकि युवाओं को बैंकों के चक्कर और ब्याज के बोझ से न जूझना पड़े।
किन क्षेत्रों में मिलेगी यह मदद?
सरकार का मुख्य जोर पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल इको-फ्रेंडली स्वरोजगार पर है। इसके तहत मुख्य रूप से दो सेक्टर्स को बढ़ावा दिया जा रहा है:
- होमस्टे (Homestay): पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों को पहाड़ की असली संस्कृति से रूबरू कराने के लिए होमस्टे योजना को इस नए चरण से जोड़ा गया है। इससे ग्रामीण पर्यटन (Rural Tourism) को पंख लगेंगे।
- जैविक खेती (Organic Farming): पहाड़ की उपजाऊ लेकिन बंजर पड़ी जमीन को फिर से आबाद करने के लिए जैविक खेती, जड़ी-बूटी उत्पादन और बागवानी करने वाले किसानों को भी इस योजना का सीधा लाभ मिलेगा।

पलायन से ‘रिवर्स पलायन’ की ओर
यह योजना केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पहाड़ों की जवानी और पानी को वहीं रोकने की एक दूरगामी सोच है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सब्सिडी और शून्य ब्याज दर वाले लोन से युवा शहरों की भीड़भाड़ छोड़कर वापस अपने गांवों की ओर रुख करेंगे, जिससे ‘रिवर्स पलायन’ (Reverse Migration) को गति मिलेगी और पहाड़ की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।


