रुद्रप्रयाग/केदारनाथ: आगामी चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों में इस बार मौसम सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रहा है। केदार घाटी में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बर्फबारी ने यात्रा प्रशासन की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। गौरीकुंड से बाबा केदारनाथ धाम तक जाने वाले 16 किलोमीटर लंबे कठिन पैदल मार्ग पर इस समय 8 से 10 फीट तक बर्फ की मोटी चादर बिछी हुई है, जिसे काटकर रास्ता बनाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।
SDRF और PWD की टीमों के छूटे पसीने
चारधाम यात्रा शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में समय पर मार्ग को सुचारू करने के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), एसडीआरएफ (SDRF) और लोक निर्माण विभाग (PWD) की संयुक्त टीमें बर्फ हटाने के काम में जुटी हुई हैं।
माइनस डिग्री तापमान और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच बर्फ काटकर रास्ता बनाने में जवानों और मजदूरों के पसीने छूट रहे हैं। रामबाड़ा से ऊपर छोटी लिंचोली, बड़ी लिंचोली, छानी कैंप और केदारनाथ बेस कैंप तक पूरे रास्ते पर कई-कई फीट बर्फ जमी है, जिससे मशीनों का पहुंचना नामुमकिन है और सारा काम मैन्युअल (मजदूरों द्वारा) तरीके से किया जा रहा है।

ग्लेशियर खिसकने का मंडराया खतरा, काम की रफ्तार धीमी
प्रशासन के सामने केवल बर्फ हटाना ही एकमात्र चुनौती नहीं है। लगातार हो रहे हिमपात और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण पैदल मार्ग के डेंजर जोन्स में ग्लेशियर खिसकने का भारी खतरा पैदा हो गया है।
- भैरव गदेरा, कुबेर गदेरा और हथनी पर्वत के आस-पास का इलाका इस समय अति संवेदनशील बना हुआ है।
- काम में लगे मजदूरों और जवानों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने एहतियातन बर्फ हटाने के काम की रफ्तार को फिलहाल धीमा कर दिया है।
- मौसम साफ होने और ग्लेशियरों के स्थिर होने के बाद ही पूरी क्षमता के साथ दोबारा काम शुरू किया जाएगा।
समय पर तैयारियां पूरी करने का दबाव
बर्फ हटने के बाद ही असली काम शुरू होगा। भारी हिमपात के कारण पैदल मार्ग की रेलिंग, पेयजल लाइनें, बिजली के पोल और रास्ते के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य अप्रैल के अंत तक न केवल रास्ता साफ करना है, बल्कि इन सभी क्षतिग्रस्त सुविधाओं की मरम्मत कर उन्हें यात्रा के लिए सुरक्षित बनाना भी है।


