
उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के सुदूरवर्ती ग्राम कोठली की निवासी 96 वर्षीया बुजुर्ग महिला अमृति देवी ने हाल ही में वृंदावन धाम की अपनी एक सप्ताह की तीर्थयात्रा सफलतापूर्वक संपन्न की। उम्र के इस पड़ाव पर जहां शारीरिक क्षमताएं साथ छोड़ने लगती हैं, वहीं दादी अमृति देवी ने अदम्य साहस और भक्ति का परिचय देते हुए ब्रज के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन किए। यह यात्रा न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन की एक बड़ी उपलब्धि रही, बल्कि यह समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी है कि भक्ति और ईश्वर के प्रति समर्पण में उम्र कभी बाधा नहीं बनती।
वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में किए दर्शन

इस एक सप्ताह की विस्तृत तीर्थयात्रा के दौरान अमृति देवी जी ने सर्वप्रथम वृंदावन के प्रमुख और सिद्ध मंदिरों में माथा टेका। यात्रा के कार्यक्रम के तहत उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री बांके बिहारी मंदिर में दर्शन किए, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच उन्होंने ठाकुर जी की छवि को निहारा। इसके अलावा, उन्होंने राधावल्लभ मंदिर और निधिवन के भी दर्शन किए। निधिवन, जिसे लेकर मान्यता है कि वहां आज भी रासलीला होती है, वहां जाकर दादी जी ने अपनी श्रद्धा निवेदित की। वृंदावन प्रवास के दौरान उन्होंने रंगधाम और भव्यता के प्रतीक प्रेम मंदिर का भी दौरा किया।

इस तीर्थयात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव श्री प्रेमानंद महाराज जी के आश्रम में जाना रहा। 96 वर्ष की आयु में संत दर्शन और उनसे भेंट करना दादी जी के लिए एक भावुक और यादगार क्षण रहा। आश्रम के वातावरण और संत के सानिध्य ने उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा को पूर्णता प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई। इस पुण्य कार्य को सफल बनाने में उनके सहयोगियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। जानकारी के अनुसार, यह पूरी यात्रा जनार्दन प्रसाद सती, अरविंद त्रिपाठी और मुन्नी देवी के विशेष सहयोग और देखरेख में संपन्न कराई गई।


