पौड़ी: ग्रामोत्थान परियोजना के अंतर्गत रैबार स्वायत्त सहकारिता न्याय पंचायत बाड़ा से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जलवायु अनुकूल कृषि पर आधारित दो दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य महिलाओं को बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप टिकाऊ, कम लागत वाली और लाभकारी कृषि पद्धतियों से जोड़ना था, जिससे वे अपनी आजीविका को मजबूत कर सकें।
प्रशिक्षण के पहले दिन ग्राम वजली की महिलाओं को ग्रामोत्थान परियोजना पौड़ी के सहायक प्रबंधक (आजीविका) धनी लाल उनियाल द्वारा जलवायु परिवर्तन और उसके कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी दी गई। उन्होंने महिलाओं को जलवायु आधारित कृषि पद्धतियों, एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन, एकीकृत कृषि मॉड्यूल, जैविक खेती, जैविक खाद व कीटनाशक, बीज संरक्षण और क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया।

प्रशिक्षण के दूसरे दिन महिलाओं को खिर्सू ब्लॉक के चमराड़ा गांव का शैक्षणिक भ्रमण कराया गया। यहां भूमि स्वायत्त सहकारिता द्वारा ग्रामोत्थान परियोजना के सहयोग से स्थापित यूनिट में गोबर से निर्मित मूर्तियां, धूप, हवन कप और अन्य उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया गया। महिलाओं ने इस भ्रमण के दौरान वैकल्पिक आजीविका के अवसरों को करीब से जाना।
प्रशिक्षण से लाभान्वित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने सीखी गई तकनीकों को अपनाकर आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में रैबार स्वायत्त सहकारिता की अध्यक्ष पूनम देवी, कोषाध्यक्ष पूनम, ग्रामोत्थान परियोजना से एम एंड ई अधिकारी मोहन सहित रैबार और भूमि सीएलएफ का स्टाफ उपस्थित रहा।


